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भारतीय जनता मजदूर महासंघ द्वारा "मजदूर महासंग्राम" "मजदूर महासंग्राम" "मजदूर महासंग्राम"
चलो राम लीला मैदान न्यू दिल्ली 25 सितम्बर मंगलवार 2012
   
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   भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रवादी विचारों को स्थापित करने वाली राजनैतिक पार्टी है जिसमें समाज के सभी वर्गो के चंहुमुखी विकास के लिए महान विचारक पंडित दीनदयाल जी उपाध्याय के एकात्म दर्शन को स्वीकार किया जिसकी मूल भावना है कि,दरिद्रनारायण की सेवा ईश्वर की सच्ची सेवा है । इसी विचार को मूर्त रूप देने के लिए अनेकानेक संगठन समान विचार धारा को प्रस्तुत करते हुए समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं । पार्टी ने भी समाज के सभी क्षेत्रों में अपनी विचार धारा को पहुँचाने के लिए अनेक मोर्चों, प्रकोष्ठो तथा सेलो का गठन किया है जो सक्षमता के साथ अपने अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं ।

 इसी प्रकार मजदूरों के क्षेत्र में समान विचार धारा का संगठन लेकिन गैर राजनैतिक संगठन (BMS) भारतीय मजदूर संघ कार्य कर रहा है यह संगठन (BMS) संगठित एवं असंगठित दोनो क्षेत्रों में मा. दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के स्वपनों को साकार करने के लिए राष्ट्रवाद की अलख जगा रहा है । लेकिन देश में भारत सरकार के अनुमानित आकड़े को यदि देखा जाय तो संगठित क्षेत्र में लगभग ५ करोड़ एवं असंगठित क्षेत्र में लगभग ४० करोड़ से अधिक लोग श्रम साधना कर अपना जीवन गुजरबसर कर रहे हैं । जीवन की इस श्रम साधना में अनेकोनेक क्षेत्र हैं जिसमें क्षेत्रों की दृष्टि से अनेकानेक लेकिन भिन्न भिन्न समस्यायें हैं, जिनके समाधान के लिए कुछ क्षेत्रों में तो कुछ नियम एवं कानून भले ही वह आधे अधूरे एवं असफल प्रतीत होते हो लेकिन हैं, परन्तु कुछ क्षेत्रों में तो न नियम हैं, और न ही कानून । ऐसी देश की लगभग ३२ प्रतिशत आबादी के लिए तीव्र गति से कार्य करना हम सब का दायित्व है । इस कल्पना को ध्यान में रखकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री नितिन गडकरी जी के द्वारा अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में पार्टी के केन्द्रीय कार्यालय ११ अशोक रोड में एक बैठक मजदूर क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के सीधे प्रवेश के संबंध में बुलाई गई जिसमें ९ राज्यों के प्रतिनिधि उपस्थिति हुए । यह बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन जी की अध्यक्षता एवं मार्ग दर्शन में सम्पन्न हुई । देश के यशस्वी नेता पूर्व प्रधानमंत्री माननीय श्री अटल जी के प्रधान मंत्रित्व काल में असंगठित क्षेत्र के लिए की गई ऐतहासिक सिफारिशों एवं प्रयासों को चर्चा का केन्द्र बिन्दु बनाकर अध्यक्ष जी ने स्पष्ट दिशा निर्देश दिये कि पार्टी असंगठित क्षेत्र के कामगारों मजदूरों के बीच कार्य प्रारंभ करें चूंकि संगठित क्षेत्रों में सक्षमता से कार्य हो रहा है । अतः असंगठित क्षेत्र जो अनेकानेक समस्याओं एवं कठिनाईयो का सामना कर रहा है उस क्षेत्र में पूरे मनोयोग के साथ सेवा भाव से कार्यकर्ता कार्य में जुटे जायें । यह कार्य श्रम संगठन (ट्रेडयुनियन) बनाकर प्रारंभ हो ताकि मजदूरो को राजनैतिक, सामाजिक एवं कानून मोर्चो पर न्याय दिलाया जा सके । इस विचार मंथन मे श्री गडकरी जी का स्वयं का ट्रेडयुनियन का अनुभव एक माडल बना जो महराष्ट्र राज्य में भारतीय जनता कामगार महासंघ के नाम से चल रहा है ।

            बैठक के भोजन अवकाश के उपरान्त श्रम संगठन के नाम के रूप में भारतीय जनता असंगठित मजदूर महासंघ या भारतीय जनता मजदूर महासंघ तय किया जाना तय हुआ जो अंत में भारतीय जनता मजदूर महासंघ (BJMM) तय हुआ ।

            इसी प्रकार का ध्वज एवं प्रतीक चिन्ह श्रम चक्र के भीतर कमल तथा एक तिहाई हरा तथा दो तिहाई केशरिया ध्वज में श्रम चक्र के बीच कमल अंकित करके ध्वज स्वीकार किया गया ।

            इसके बाद मजदूर क्षेत्र में वर्षो से कार्य करने वाले श्री किशोर जी देशपाण्डे, डॉ किन्नरे, महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष श्री गोपाल पाटिल, श्री प्रहलाद पटेल, श्री रूद नारायण पाणी, सांसद राज्य सभा सहित अन्य सदस्यों को संविधान बनाने की जिम्मेवारी सौंपी गई । विधान की प्रारंभिक प्रतियॉं भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष श्री नितिन जी गडकरी, संगठन महामंत्री माननीय श्री राम लाल जी, प्रभारी महासचिव श्री विजय गोयल, श्री धर्मेन्द्र प्रधान एवं श्री थावर चंद जी गहलोत को प्रेषित की गई साथ ही राज्य भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्षों एवं संगठन महासचिवों को उनके ईमेल एवं वेवसाइट पर केन्द्रीय कार्यालय से प्रेषित की गई ।

 

२३ नवम्बर २०१०

 

            २३ नवम्बर २०१० का ऐतिहासिक दिन जब दिल्ली के फिक्की सभागृह में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन जी गडकरी ने राष्ट्रीय महामंत्री श्री रामलाल जी, श्री थावर चंद जी, श्री जगत प्रकाश नड्डा जी, श्री  विजय गोयल जी, श्री धर्मेन्द्र प्रधान जी, राष्ट्रीय सचिव श्री मुरलीधर राव जी,  श्री संतोष गंगवार जी, सुश्री सरोज पाण्डे जी, श्रीमती सुमित्रा महाजन जी, श्री महेन्द्र पांडे जी, भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष श्री विरेन्द्र गुप्ता जी,  म.प्र. भा.ज.पा. के अध्यक्ष श्री प्रभात झा जी एवं सांसद सर्व श्री रूद्रनारायण पाणी जी, श्री रघुनंदन शर्मा जी, श्री अनिल दवे जी, श्री वीरेन्द्र कुमार जी सहित पंजाब के श्रम मंत्री की उपस्थिति में भारतीय जनता असंगठित मजदूर महासंघ की स्थापना की घोषण हुई जिसमें ध्वज को स्वीकार किया गया । कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय श्री महासचिव जगत प्रकाश जी नड्डा जी ने किया राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने अपने उद्बोधन के दौरान BJMM के प्रथम अध्यक्ष के रूप में मध्यप्रदेश के कार्यकर्ता श्री प्रहलाद पटेल को यह जिम्मेवारी सौंपी । इस घोषणा के बाद BJMM की यात्रा का प्रारंभ हुआ ।

 

उद्देश्य

           

      हमारा मनतव्य स्पष्ट है कि हमारी संस्कृति मजदूर एवं मालिक में कोई टकराव नहीं देखती वह एक दूसरे की पूरक हैं पाश्चात्य विचारों ने हमारी प्राचीन स्थापित संघर्ष से परे,पारिवारिक भाव से परिपूर्ण एवं अपनी अपनी जिम्मेवारियों को पूरा करने वाली श्रम साध्य संस्कृति को विकृत करने का कार्य किया है । परिवार में कमाने वाले,तथा कम कमाने वालो एवं ना कमाने वालो के बीच कभी संघर्ष न ही रहा है न कमाने वालो के मन में संकोच तथा कमाने वाले के मन में अपने से कम उम्र वाले के प्रति या कम योग्यता वाले के प्रति समझाइस का भाव रहा है ताकि भविष्य में वह भी श्रम साधना की ओर उदृद्त होकर परिवार समाज तथा देश के विकास में सहयोगी बने तथा अपनी प्रतिष्ठा को भी बढ़ाये यह भारतीय संस्कृति है जहॉं लाचार वृद्ध बीमारो के प्रति सदैव सेवा का भाव रहा है वे दया के पात्र नहीं बल्कि हमारी पारिवारिक जिम्मेवारी के योग्य एवं अभिन्य हिस्से है जो इस जिम्मेदारी को पूरा नही करता वह कृतन समझा जाता था । लेकिन पश्चिम की संस्कृति ने "परोपकार" के पारिवारिक भाव को व्यापार के नजरिये में बदल दिया जो संघर्ष का कारक एवं कारण बन गया । चाहे वामपंथी हो या अन्य उनकी दृष्टि में मालिक का हित,मजदूरों के हकों को नुकसान  पहुँचाकर प्राप्त होता है तथा मजदूरो का हित मालिको के हको को हानि  पहुँचाने बगैर संभव नहीं है,अतः संगठन की ताकत से हक छीनो । यह प्रवृति ही टकराव का कारण है BJMM इस प्रवृत्ति को संघर्ष एवं विघटन का दोषी मानती है ।

            BJMM का स्पष्ट मत है कि मजदूर एवं उसके परिवार जनों के लिए बीमारी एवं दुर्घटना जैसी परिस्थिति उसे निःसहाय बना देती है भारतीय संस्कृति में परोपकार के भाव ने ऐसी परिस्थितियों से निवृति के लिए सामाजिक सरोकारों से समाधान दिया है लेकिन बदलते परिवेश में ऐसे कार्यो में जहॉं कही भा.ज.पा की सरकारे है या रही है उन्होने सरकार के सरोकारो में शामिल कर दिया  ऐसे सरकारी प्रयास मालिक एवं मजदूरों के बीच संघर्ष समाप्त कर सकते हैं हम पुनः मालिक एवं मजदूरों के बीच परिवार भाव बढाने में सफल होगे ऐसा हमारा विश्वास है ।

           जैसे कोई मजदूर किसी किसान,छोटे व्यापारी,कर्मचारी या अन्य क्षेत्रों में कार्य करता है उसका उसे पारिश्रमिक मिलता होगा वह चाहे वस्तु के रूप में हो या विनियम के रूप में या नगद । लेकिन यदि वह मजदूर या उसके परिजन किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाये या दुर्घटना का वह शिकार हो जाये तब अनेकानेक लोग ऐसे होगें जो शायद उस मजदूर को अकेले उस मजदूर को आर्थिक सहयोग करने में सक्षम ही न हो तब उस मजदूर का क्या होगा ? आन्दोलन या संघर्ष ? या अन्य मार्ग ?यदि सरकार बीमारी एवं दुर्घटना में किसी श्रमिक को लाभ देने के लिए कोई योजना बनाती है जो भा.ज.पा. शासित राज्यों में हैं ऐसी स्थितियों में क्या उस किसान,व्यापारी,उद्योग पति,ठेकेदार या कर्मचारी अधिकारी का कर्त्तव्य नही है कि वह अपने परिवार या प्रतिष्ठान में सेवा दे रहे इस परिवार के सदस्य को एक श्रमिक के रूप में पंजीकृत करावाये । लेकिन वाम पंथियों एवं श्रम विभाग के भ्रष्ट्राचार ने इस भावना को भय में तब्दील कर दिया है हमेशा मालिक के मन में भय बन गया कि यदि यह मजदूर पंजीकृत हो गया या किसी संगठन से जुड़ गया तो वह अनेकानेक मॉंगे करने लगेगा मुकदमा बाजी होगी । दुष्परिणाम स्वरूप अपने परिवार एवं प्रतिष्ठान में आपके सहयोग एव श्रम करने वाला आज भी हमारा नहीं वन सका । यह भय एवं भ्रम समाप्त करना ही भारतीय जनता मजदूर महासंघ के उद्देश्य हैं । हम मालिक से चर्चा कर के कि असाहय रोगो में हम अपने इस सहयोगी को शायद हजार का सहयोग कर सकते है पर स्नेहवश लाख नही दे सकते क्योकि क्षमता नही है या कही कही ममता नहीं है पर यदि वह श्रमिक यदि श्रमिक कार्डधारी बन जाय या आपके द्वारा बनवा दिया जाय तो गंभीर बीमारी में सरकार उसकी मद्द करने के लिए तत्पर है उसका लाभ तो आप दिलवा सकते हैं । यह कार्य समयाभाव या अल्पजानकारी में शायद वह मजदूर न कर सके लेकिन आप उसके सहयोगी बन सकते हैं या फिर BJMM के पास  पहुँचकर या  पहुँचाकर इस पुण्य कार्य के निमित्त बनकर एक अच्छे भारतीय बन सकते हैं । ऐसा दुर्घटनाओं में भी लाभ दिलवा सकते हैं । कल्पना करें कि किसी परिवार में कमाने वाला एक ही हो और वह बीमारी या दुर्घटना का शिकार हो जाये तब वह परिवार कर्जो में और दब जाये तो क्या वह परिवार कभी अपने पैरों पर खड़ा हो सकता है ?क्या उसके बच्चे कभी शिक्षा पा सकते है ?क्या फिर बाल मजदूरी रोकी जा सकती है ? इस प्रकार के सभी प्रश्नों के उत्तर आप स्वयं बन सकते है थोड़ी सी सक्रियता थोड़ा सा सहयोग करके यही अपेक्षा है ।

 
 

                               भारतीय  जनता मजदूर महासंघ,  11 अशोका रोड, नई दिल्ली - 110001    दूरभाष :  011 -  23005700